Description
……उसकी आखें भर आई ।
उसने धीरे से अकादमी के गेट के भीतर क़दम रखा
यह सिर्फ़ एक परिसर में प्रवेश नहीं था, यह उस लड़के का एक नए जीवन में प्रवेश था जिसने संघर्ष को अपनी हार नहीं, अपनी ताक़त बना लिया था ।
बढ़ते भी चलो , कट्टे भी चलो
की सर भी बहुत बाजू भी बहुत
बढ़ते भी चलो की अब डेरे
मंज़िल पे ही डाले जाएँगे
डी एंड नहीं….डी बिगनिंग






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