Description
वैदिक, बौद्ध और जैन वाङ्मय, राजतरंगिणी के समान प्राचीन इतिहास, मेगेस्थनीस, युआनच्वांग सदृश विदेशी इतिहासकार तथा यात्रियों के वृत्तांत, प्राचीन शिलालेखों, दानपत्रों आदि साधनों से प्रत्यक्ष ऐतिहासिक व सत्य से अधिक संबद्ध जो सामग्री प्राप्त होती है, उनका भी सहारा लेकर प्राचीन भारतीय शासन-पद्धति के साधार, सांगोपांग किन्तु अनतिविस्तृत विवेचन करने का प्रयास इस ग्रन्थ में किया गया है। प्राचीन भारतीय इतिहास वैदिक, उपनिषद् मौर्य, गुप्त आदि काल खंडों में विभाजित है। विवेचित संस्थाओं और शासनतत्त्वों का विकास ऊपर निॢदष्टï काल-खण्डों में किस प्रकार हुआ यह दिखाने का प्रयत्न प्रत्येक अध्याय में किया गया है। विभिन्न प्रान्तों में शासन-संस्थाओं का विकास कभी-कभी किस कारण भिन्न प्रकार से हुआ इसे भी बतलाने का, जहाँ संभव था, प्रयत्न किया गया है। प्राचीन भारतीय इतिहास तथा राजनीति के अध्येताओं के लिए मानक ग्रन्थ।






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