Description
गोकुल मथुरा द्वारिका
मूल गुजराती में समादृत इस कथात्रयी गोकुल मथुरा द्वारिका के नायक हैं श्रीकृष्ण, जो कथा में आद्योपांत यवनिका के पीछे तिरोहित रहते हैं, किंतु पाठक पग-पग पर उनका सान्निध्य पाता चलता है – अदृश्य, अगोचर, किंतु अनुभूति में व्याप्त। फिर ऐसे श्रीकृष्ण का जीवन-चरित लिखते हुए लेखक ने गोकुल मथुरा द्वारिका जैसे स्थलवाचक नाम क्यों दिये ? श्रीकृष्ण का जीवन तो समग्र भारतवर्ष के साथ संबद्ध है ?
गोकुल मथुरा द्वारिका कहते ही क्या संपूर्ण कृष्ण हमारे मानसपटल पर नहीं आ उपस्थित होते ?
गोकुल के लोकनायक कृष्ण !
मथुरा के युगपुरुष कृष्ण !
द्वारिका के योगेश्वर कृष्ण !



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