Description
“सात सौ बीस क़दम – अमृता प्रीतम गहन मानवीय अनुभूति और स्त्री-पुरुष के मध्य रूहानी प्रेम की कथाएँ लिखती रही हैं। वे अपने लेखन में ऐसा समय, साहस और समृद्धि चुनती हैं जो समाज के प्रत्येक पक्ष में है लेकिन कभी दोहरे मानदण्ड रखने वाले समाज के चलन अनुसार इन्हें अपनी राह से भटका दिया जाता है तो कभी चुप्पी ग्रहण करने को दबाव बनाया जाता है। उनके कृतित्व का यह असाधारण गुण है कि जब वह कविता लिखती हैं तो अपनी अनुभूति की तरलता को ऐसा रूप देती हैं जो गद्य की तरह सहजता से हृदय में उतर जाता है। और जब वह उपन्यास या कहानी लिखती हैं तो भाषा में कविता की लय लहराने लगती है। यदि उनकी अनेक कहानियों में से चुनकर श्रेष्ठ का संकलन कर लिया जाये और वह भी स्वयं अमृता प्रीतम द्वारा, तो पाठक को पुस्तक के रूप में अमृत कलश ही प्राप्त हो जाता है। उनकी चुनी हुई कहानियों का यह संग्रह ‘सात सौ बीस क़दम’ ऐसा ही है । अमृता प्रीतम की ये कहानियाँ स्त्री-पुरुष के योग-वियोग की मर्म-कथा का आईना है। इन्हें परिवार और समाज से प्रताड़ित नारी की पीड़ाओं के रूप में भी चिन्हित किया जा सकता है। इन कहानियों का विषय विराट और विस्तृत है जो चिन्तन के विविध पक्षों को उजागर करता है। “






Reviews
There are no reviews yet.