DISCOUNT 20%

Dwandwageet (Hindi) (HB) By Ramdhari Singh ‘Dinkar’ (‎9788180313554)

316.00

(20% OFF)

Add Rs.45/- for PAN India delivery
Free delivery of orders above Rs. 499/- by Registered Post

Out of stock

Description

द्वन्‍द्वगीत

डॉ. नगेन्‍द्र दिनकर को द्वन्‍द्व का कवि मानते हैं। और सचमुच अपने द्वन्‍द्व की साधना में दिनकर जितने बड़े क्रान्ति के कवि दिखते हैं, उतने ही प्रेम, सौन्‍दर्य और करुणा के भी। यह विशेषता छायावादोत्तर युग में उनके अलावा अन्‍यत्र दुर्लभ है। ‘द्वन्‍द्वगीत’ में इन सबका सम्मिलित रूप देखने को मिलता है।

इस पुस्‍तक में दिनकर ने द्वन्‍द्वात्‍मकता की ज़मीन पर जो पद-सृजन किया है, वह उनकी अभिधा और व्‍यंजना-अभिव्‍यक्ति में एक अलग ही लोक की रचना करता है। संग्रह के कई पदों से पता चलता है कि वे शोषित जन की पीड़ा के वाचक नहीं, उसे संघर्ष और सरोकारों के रंग में रँगनेवाले चितेरे हैं। कहते हैं—‘चाहे जो भी फ़सल उगा ले/तू जलधार बहाता चल।’ जो क्रूर व्‍यवस्‍था के शिकार हैं, उन्‍हें वे झुकते, टूटते नहीं देख सकते। उनकी नज़र में वही असली निर्माणकर्ता हैं, जिनको कुचलकर कोई तंत्र क़ायम नहीं रह सकता। इसलिए हुंकार भरते हैं कि ‘उठने दे हुंकार हृदय से/जैसे वह उठना चाहे/किसका, कहाँ वक्ष फटता है/तू इसकी परवाह न कर।’

y Ramdhari Singh ‘Dinkar’ (‎9788180314117)

Additional information

Weight 0.380 kg

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Dwandwageet (Hindi) (HB) By Ramdhari Singh ‘Dinkar’ (‎9788180313554)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *