Description
बीसवीं शताब्दी की समय-गाथा हिन्दी कहानी की गौरवमयी विरासत और विस्मयकारी विस्तार में मौजूद है। उसके विभिन्न मुकाम, उपलब्धियों और कहानीकारों के मूल्यांकन पर अनेक पुस्तकें हैं। लोकप्रिय विधा कहानी की आलोचना परम्परा भी विकसित हुई। ऐसे प्रयासों से कहानी आलोचना का नया सौंदर्यशास्त्र निर्मित हुआ। प्रायः उनमें कथा प्रवृत्तियों, कहानियों के उल्लेख और कहानीकारों पर सघन विवेचन तो हैं, पर कहानियों के एकल पाठ यानी उन पर एकाग्र आलोचनाएँ कम ही हैं। नीरज खरे द्वारा सम्पादित ‘हिन्दी कहानी वाया आलोचना’ कहानी आलोचना की ऐसी पहली किताब है, जिसमें बीसवीं सदी की सत्तर प्रतिनिधि कहानियों पर अलग-अलग आलोचनाएँ एक साथ हैं। हिन्दी कहानी के आरम्भिक काल, विभिन्न पड़ाव, नई कहानी, साठोत्तरी आन्दोलन और उत्तर सदी में मुक्त प्रवाह के मुताबिक़ किताब के तीन खंड हैं—‘बढ़ते क़दमों के निशान’, ‘कहानी : नई होने की डगर’ तथा ‘कहानी : साठोत्तरी और उत्तर सदी’। इन खंडों में क्रमशः रखी गई आलोचनाएँ पैंतालीस लेखकों की विचार-दृष्टि और लेखन दक्षता का प्रतिफल हैं—जिनमें कहानियों के नए मूल्यांकन और आलोचना-पद्धतियों के बदलाव भी परिलक्षित हैं।
सम्पादक ने लम्बी भूमिका में विधागत प्रवाह पर अत्यन्त सतर्क नज़र रखी है—जिससे ‘बीसवीं सदी की हिन्दी कहानी परम्परा’ का सुव्यवस्थित संज्ञान, प्रवृत्तियों की पहचान या संकलित आलोचनाओं तक जाने का कोई रास्ता या सूत्र भी हासिल हो जाता है। पिछले दो दशकों से कथालोचना में नीरज खरे की सक्रिय उपस्थिति रही है। इस पूरे उपक्रम में उनकी आलोचकीय समझदारी और सम्पादकीय अभिरुचि प्रतिबिम्बित है। आलोच्य कहानियाँ एक सदी के सफ़र की नुमाइंदगी करती हैं और अनेक विश्वविद्यालयों के स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी शामिल हैं। आलोचना की ऐसी किताब का अभाव लम्बे समय से महसूस किया जा रहा था; जिसमें परम्परा की प्रतिनिधि कहानियों पर मुकम्मल विचार हो। बीसवीं सदी की यात्रा में कहानी की रचना मुद्रा, संरचना के बदलाव और संवेदना के परिवर्तन ग़ौरतलब हैं। इसीलिए बेहतर और बोधगम्य आलोचनाओं का यह सुविचारित चयन समावेशी है। कहानी के पाठकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए उनकी ज़रूरतों, रुचियों और उद्देश्यों के मुताबिक़ यह किताब बहुउपयोगी ही नहीं; अत्यन्त सार्थक और स्थायी महत्त्व की है।




![Rich Dad Poor Dad [Hindi translation of 'Rich Dad Poor Dad'] (Hindi) By Robert T. Kiyosaki (9788186775219)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788186775219.jpg)

Reviews
There are no reviews yet.