Description
साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत श्रेष्ठ उपन्यास ‘भूले-बिसरे चित्र’ के विषय में आलोचकों ने कहा था – ‘‘एक महान कृति – भारतीय समाज और परिवार के विकास की विविध दिशाओं और रूपों का एक विराट एवं प्रभावोत्पादक चित्र…’’ ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ और ‘भूले-बिसरे चित्र’ की परम्परा में ‘सीधी-सच्ची बातें’ श्री भगवतीचरण वर्मा की तीसरी महत्त्वपूर्ण कृति है जिसमें 1939 से 1948 तक के काल की एक सशक्त कहानी है, और जिसमें मानसिक संघर्ष और राजनीतिक संघर्ष का अभूतपूर्व सम्मिश्रण हुआ है। मध्यवर्गीय परिवार का एक युवक, कुशाग्र बुद्धि और तेजस्वी, अपने अन्दरवाली नैतिकता, आस्था और विश्वास के साथ अनायास ही उस नवीन हलचल में आ पड़ता है, द्वितीय महायुद्ध, देश की स्वतंत्रता, देश का बँटवारा जिसके भाग थे। और अंत में उसके सामने थी अन्दर की घुटन, आदर्शों के पीछे वैयक्तिक स्वार्थों और कमजोरियों का विकृत चित्र और निराशा। ‘सीधी-सच्ची बातें’ एक सशक्त कहानी है, और साथ ही सीधी-सच्ची बातें भी।


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