Description
कबीर वाणी पीयूष कबीर की प्रतिनिधि रचनाओं का संकलन है। कबीर का प्रमुख साहित्य तीन खण्डों में विभक्त है—रमैनी, साखी और शब्द या। अद्यावधि विश्वविद्यालयों में साखी और पदों का ही अध्ययन-अध्यापन होता रहा है, जिसका परिणाम यह हुआ है कि हिन्दी के पाठक कबीर वाणी के प्रमुख अंग—रमैनी से प्राय: अपरिचित ही रहे हैं। अतएव एक ऐसे संग्रह की नितान्त आवश्यकता थी जिसमें कबीर-वाणी का सारतत्व समाविष्ट हो, जिसके द्वारा कबीर के साधक और कवि रूप को भली-भाँति समझा जा सके। प्रस्तुत संकलन इसी लक्ष्य की पूर्ति का प्रयास है। इसमें साधक-चित्त की गहन अनुभूति से निसृत अमर वाणी के तीनों रूपों-साखी, रमैनी और पदों—के चुने हुए ऐसे अंशों को संकलित किया गया है, जिससे कबीर के सिद्धान्त, साधना एवं काव्य-वैशिष्ट्य को सुगमता से परखा जा सके। अनुक्रम : भूमिका, 1. कबीर : व्यक्तित्व विश्लेषण, 2. कबीर का प्रामाणिक साहित्य, 3. कबीर के दार्शनिक विचार, 4. कबीर का काव्य, मूल पाठ : 1. साखी, रमैनी, 3. पद।






Reviews
There are no reviews yet.