Description
इस पाण्डुलिपि के रचयिता का इरादा कोई ऐसा मिथकीय चरित्र गढ़ना हो जिसके जरिए वह भारतीय राष्ट्रवाद की नयी अवधारणा के सिद्धांतों को सामने लाये।
About the Author:
पार्थ चटर्जी सेण्टर फॉर स्टडीज़ इन सोशल साइंसेज़, कोलकाता में लम्बे समय तक प्रोफेसर व निदेशक रहने के बाद अब भी मानद प्रोफेसर की हैसियत से संस्थान से जुड़े हैं। साथ ही न्यूयॉर्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में एन्थ्रोपोलॉजी व मध्यपूर्व, दक्षिण एशिया और अफ्रीका अध्ययन के विभाग से सम्बन्ध हैं।






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