Description
नूरबाई ने अपनी हँसी को समेटा । गरदन ने जरा-सी लचक खाई । बालों की एक काली लट गोरे गालों को छूकर कान के पास पहुँच गई । नूरबाई की बड़ी-बड़ी मद- भरी आँखें एक बार पूरी खुलीं, बरौनियों ने भौंहों का स्पर्श किया और फिर नीची पड़ गईं । वह मोहन को तिरछी चितवन देखने लगी । होंठों पर नुकीली मुसकान थी ।
एक क्षण बाद उसने कहा, ‘मैंने सब पा लिया, सब । और आँचल बाँधकर गाँठ लगा ली । ‘
-इसी उपन्यास से





![Shakti Ke 48 Niyam [Hindi translation of '48 Laws of Power'] By Robert Greene (Hindi) (9788184081039)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788184081039.jpeg)
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