Description
“वेदों में आयुर्वेद की खोज पर बात की जाए तो सबसे पहले ऋग्वेद में आयुर्वेद से जुड़े कुछ अंश प्राप्त होते हैं, जिनका उल्लेख वैद्य-परंपरा के अश्विनीकुमारों, चरक एवं सुश्रुत आदि की कायचिकित्सा एवं शल्यचिकित्सा में देखने को मिलता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े वैद्य-परंपरा के अधिकतर प्रयास अश्विनीकुमारों से माने जाते हैं। यही वजह है, जो इन्हें ‘देवानां भिषजौ’ की उपाधि दी गई थी। आगे चलकर चिकित्सकीय परंपरा आचार्य चरक की ‘चरक संहिता’ में कायचिकित्सा पर केंद्रित रही, तो वहीं आचार्य सुश्रुत की शल्यचिकित्सा पर केंद्रित रही।
आयुर्वेद की यह वैद्य-परंपरा आज भी जीवित है। आज भी गाँव, कस्बों एवं जनजातीय क्षेत्रों में लोग इलाज के लिए वैद्य के पास जाते हैं और पुरानी आयुर्वेदिक विधियों के माध्यम से रोगों का उपचार कराते हैं। चिकित्सा एवं औषधियों की बात करें तो वेदों में विभिन्न प्रकार की चिकित्सकीय वनस्पतियों एवं औषधियों का वर्णन मिलता है। इसी तरह यजुर्वेद में भी विभिन्न औषधियों की प्रशंसा का वर्णन देखने को मिलता है।”



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