Description
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा आधुनिक भारत की एक ऐसी महत्त्वपूर्ण कहानी है जिसे पूरी तरह समझना अभी भी बाकी है। 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने इसकी शुरुआत ऐसे समय में की, जब देश पराधीन था और समाज को अनुशासन, राष्ट्रभाव और निस्स्वार्थ सेवा की नई दिशा की आवश्यकता थी। एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह संगठन समय के साथ एक व्यापक जन-आंदोलन में विकसित हुआ, जिसने समाज, नेतृत्व और अनेक संस्थाओं को गहराई से प्रभावित किया।
यह पुस्तक संघ के सौ वर्षों की इसी असाधारण यात्रा को समझने का एक संतुलित प्रयास है। रूढ़ धारणाओं और विवादों से आगे बढ़ते हुए यह पुस्तक संघ को एक सामाजिक आंदोलन, एक सांस्कृतिक शक्ति और आधुनिक भारत के निर्माण में एक शांत किंतु स्थायी प्रभाव के रूप में देखने का प्रयास करती है। इसमें स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्र-निर्माण के प्रारंभिक वर्ष, आपातकाल तथा इक्कीसवीं सदी के तीव्र परिवर्तन जैसे महत्त्वपूर्ण चरणों के माध्यम से संघ के विकास को रेखांकित किया गया है।
इतिहास, चिंतन और विश्लेषण के संतुलित संयोजन के माध्यम से यह पुस्तक यह समझने का प्रयास करती है कि कैसे बिना चुनावी महत्त्वाकांक्षा, सरकारी संरक्षण या औपचारिक सत्ता के कोई संगठन एक शताब्दी तक निरंतर प्रासंगिक बना रह सकता है। यह पाठकों को संघ की यशस्वी यात्रा और समकालीन भारत के नैतिक एवं नागरिक जीवन को आकार देने में उसकी भूमिका को समझने का अवसर देती है।”


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