Description
भारतरत्न डॉ. भीमराव रामजीराव अंबेडकर, जिन्हें आज लोग श्रद्धा से बाबा साहब कहकर पुकारते हैं। उनका व्यक्तित्व इतना वृहद् और बहुआयामी है, जिसका विस्तार आकाश के समान विस्तृत और समुद्र की भाँति गहन है। उनके विषय में लिखना बड़ा दुष्कर कार्य है, जिसने युग के प्रवाह को मोड़ दिया, रूढिय़ों को तोड़ दिया और जब हिंदू धर्म में कोई सुधार न हुआ तो हिंदू धर्म ही छोड़ दिया। देवी, देवता, ऋषि-मुनि, महात्मा, शंकराचार्य आदि यहाँ तक कि अवतार भी शूद्र को समता तो क्या मानवता का दर्जा भी न दिला सके, उन्हें डॉ. भीमराव ने पूर्ण मानवता का दर्जा ही नहीं दिलाया अपितु समता का अधिकार भी दिलाया। इतनी महान् विभूति के बारे में लिख पाना मेरे सामथ्र्य के बाहर है, फिर भी मैंने उन पर लिखने का प्रयास किया है, क्योंकि अभी तक बाबा साहब पर जो भी लिखा गया है, भले ही वह हिंदी, मराठी, अंग्रेजी अथवा अन्य किसी भारतीय भाषा में लिखा गया हो, वह सबका सब गद्य में लिखा गया है। किंतु मैंने सर्वप्रथम उनके संपूर्ण संघर्षमय जीवन को ‘भीमचरित महाकाव्य’ शीर्षक के अंतर्गत काव्यबद्ध करने का प्रयास किया है।






Reviews
There are no reviews yet.