Description
`खेला` विश्व बाज़ार की उठापटक और इनसान की जद्दोजहद का जीता-जागता तमाशा पेश करता है। एक नितांत अलग दुनिया की तस्वीर जिसमें कच्चे तेल के करतब, मज़हब और मारकाट के खेले चलते जा रहे हैं। विश्व बाज़ार की भाग-दौड़, धर्म की धमक भरी अँधेरगर्दी और हिंसा की तथाकथित सहिष्णुता, पाठक को झटके से होश में लाती है।






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