Description
प्रत्येक चिकित्मा पद्धति को तरह ‘आयुर्वेद है का उददेश्य भी यही है कि आप स्वस्थ रहें। स्वस्थ होने का अर्थ इम शास्त्र के अनुसार अपनी प्रकृति में स्थित रहना हैं। जैसे ही शरीर की
प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है, हम रोग को गिरफ्त में आ जाते है -रोगी हो जाने है ।
भारतीय ऋषियों ने अपनी साधना द्वारा प्रकृति के त्तत्वों को जाना-पहचाना, उनका विश्लेषण किया और यह बताया कि यदि प्रयोग करने की विधि आती हो, तो संसार में कुछ भी
हानिकारक नहीं है -विष से अमरता प्राप्त को जा सकती हैं।
आयुर्वेद अत्यधिक विस्तृत शास्त्र है , इसलिए इम पुस्तक में हमने कुछ विशेष रोगों के संदर्भ में ऐसी ज़डी-बृटियों को चुना है, जो बाजार में आसानी से उपलब्ध है और कोई भी
व्यवित्त अल्प परिश्रम से उनका नुस्खा बना सकता है।
प्रत्येक व्यक्ति और परिवार के लिए उपयोगी है यह पुस्तक ।






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