Description
सन्त रैदास, रूढि़, धाॢमक जटिलता और समाज को वितरित करने वाली व्यवस्था और विश्वास का साधु-प्रत्या?यान करने वाले संत हैं। इस पुस्तक में अनेक विशेषताएँ हैं। सन्त रैदास का जीवनवृत्त है, निजंधर साहित्य में प्राप्त रैदास पर कुछ महत्त्वपूर्ण सन्दर्भ हैं, उनकी रचनाओं से स?बन्धित कई 'पंच बानीÓ संग्रहों का उल्लेख है, रचनाओं की प्रामाणिकता का विचार है, साहित्य का मूल्यांकन और उन हस्तलेखों का उल्लेख है जहाँ से 'शबनमÓ जी को रैदासजी की कविताएँ मिलीं। इस पुस्तक में कुछ महत्त्वपूर्ण परिशिष्ट हैं जिनमें रैदास परिचयी और कबीर-रैदास गोष्ठी का पाठ भी दिया हुआ है। अनुसंधान कॢमयों और अध्येताों के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी है






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