Description
शैक्षिक परिस्थितियों की रहस्यात्मकता का उद्घाटन प्रत्येकप्रबुद्ध शिक्षाशास्त्री की संकल्पना का केन्द्रवर्ती बिन्दु होता है। इधर के दशकों में वैज्ञानिक ज्ञान एवं सम् प्रेषण की टेक्क्रोलॉजी के विस्तार के साथ इस ओर विशेष आकर्षण बढ़ा है। इसी परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक अनुसन्धान की महत्ता एवं उपयोगिता का आकलन करना अधिक समीचीन प्रतीत होता है। हमारी शिक्षा व्यवस्थाओं का जाल जिस द्रुत गति से बढ़ा है, उनकी उपादेयता एवं प्रभाविता के सम्बन्ध में चिन्ता भी मुखर हुई है । इस पहलू के गवेषणात्मक अध्ययन के लिए ही शैक्षिक अनुसन्धान की जरुरत पड़ती है। भारतीय सन्दर्भ की विवशताओं को सामने रखकर प्रस्तुत ग्रन्थ में शैक्षिक अनुसन्धान विधि के व्यावहारिक पक्षों को प्राथमिकता दी गयी है जिससे सेवारत एवं नव्य शिक्षक अनुसन्धान की ओर सहज रुप में प्रवृत्त हो सकें। शैक्षिक शोध के भारतीय परिप्रेक्ष्य, अभिप्राय, क्षेत्र, प्रणाली तथा शोध-प्रबन्ध एवं शोध की रुपरेखा प्रस्तुति हेतु आवश्यक सुझाव प्रत्येक अध्याय में दिए गए हैं। यह प्रयास किया गया है कि शोधकर्ताओं में अनुसन्धान की परिशुद्धता एवं गुणवत्ता के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता जागृत हो।






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