Description
डॉ. अंजुम बाराबंकवी बुनियादी तौर पर ग़ज़ल के शायर हैं I उनकी ग़ज़लों मैं सागर को गागर मैं सामने का फ़न है और सूफ़ियत भी. वे इतिहास और वर्तमान को तुलनात्मक दृष्टि से देखते हैं, साथ ही वे परिवर्तन के पक्षधर भी हैं, और यथास्थिति के विरुद्ध आक्रोश उनकी लिखावट मैं स्पष्ट महसूस किया जा सकता है.
डॉ. अंजुम बाराबंकवी भी शायर में अपनी अदाओं के साथ हमारे सामने हैं. वे एक ख़ास प्रकार की शख़्सियत इस रूप में भी रखते हैं की उन्होंने खुमार बाराबंकवी और डॉ. बशीर बद्र जैसे जाने-पहचाने समकालीन शायरों पर काम किया है! इसलिए शायर क्या होती है, इसके गन तो वो जान ही चुके हैं. मुशायरे की शायरी क्या होती है, इसे भी मुशायरों में आते-जाते उन्होंने जान लिया है.






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