Description
तसलीमा नसरीन की यह पुस्तक जिसका अनुवाद सुशील गुप्ता ने किया है विभिन्न अखबारों में लिखे हुए कॉलमों का संग्रह है! यह किताब उन औरतों को समर्पित है,जो अपने कदम,’लोग क्या कहेंगे’ के दर से पीछे नहीं हटातीं। उन लोगों की जो इच्छा होती है,वही करती हैं। वर्तमान युग के नन्हें अंश के टुकड़े –टुकड़े चुन कर लेखिका ने इस पुस्तक में जोडे है यह पुस्तक महिलाओं के भविष्य को जगमगाता हुआ देखने की सुखद चाह का नतीजा है।






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