Description
भक्ति आन्दोलन का प्रसार और विकास क्षेत्रीय-प्रान्तीय और अखिल भारतीय दोनों स्तरों पर हुआ। उसके क्षेत्रीय और प्रान्तीय रूप एक समान नहीं हैं। उनके देश-काल, धर्म-संस्कृति, भाषा में अन्तर अवश्य है। यहाँ तक कि उनके विकास के स्वरूप में भी अन्तर है। बावजूद इसके इन क्षेत्रीय और प्रान्तीय रूपों में एक अन्तर्सूत्र मौजूद है और वह अन्तर्सूत्र है भक्ति। वह सारे क्षेत्रीय-प्रान्तीय भक्ति आन्दोलन को जोड़कर रखती है। यही कारण है कि भक्ति आन्दोलन के अखिल भारतीय रूप और उसकी सामान्य विशेषता को जानने-समझने के लिए उसके क्षेत्रीय-प्रान्तीय रूपों का ध्यान रखना जरूरी है। इसी प्रकार क्षेत्रीय-प्रान्तीय रूपों की विशिष्टता को पहचानने के लिए उन्हें अखिल भारतीय भक्ति आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने-समझने की जरूरत है।
असम के वैष्णव भक्ति आन्दोलन के प्रवेश द्वार शंकरदेव हैं। इसलिए उनसे और उनके जीवन कर्म एवं उनकी वैष्णव भक्ति से गुजरे बगैर असम के भक्ति आन्दोलन और भक्ति कविता को ठीक से नहीं समझा जा सकता है।





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