Description
हिन्दी कथालोचना के लगभग सौ वर्षों के इतिहास में यह आलोचनाकृति एक अन्यतम शिखर उपलब्धि है। यह सुपरिचित कहानियों की दुनिया के अब तक कराए गए प्रत्यक्ष से सर्वथा विलग उसकी अन्दरूनी छिपी दुनिया को पहली बार ‘रिवील’ करती है।
इस कृति से कहानी की आलोचना की एक समीचीन नयी सरणि आविष्कृत और प्रतिष्ठित हुई है।
इस पुस्तक में पहली बार ‘कफन’ में आधुनिकता बनाम उत्तर-आधुनिकता, कर्म-संस्कृति बनाम उपभोक्ता-संस्कृति, ‘पूस की रात’ में प्रकृति बनाम संस्कृति और ‘वर्ग-चेतना’, की विमुखता बनाम सजगता, ‘मंत्र-2’ में बाहरी बनाम आन्तरिक सर्प, ‘ईदगाह’ में मूर्त बनाम अमूर्त ईदगाह, ‘वापसी’ में कालपरक बनाम स्थलपरक, विधेयात्मक बनाम निषेधात्मक वापसी, ‘वारेन हेस्टिंग्स का साँड’ में पशु साँड बनाम हेस्टिंग्स रूपी साँड, ‘और अन्त में प्रार्थना’ में हैजा का संक्रमण बनाम भ्रष्टाचार का संक्रमण, ‘रुको इंतज़ार हुसैन’ में इंतजार हुसैन बनाम जवाहरलाल तथा ‘कब तक’ में परिवार से देश तक में यथास्थितीकरण से मुक्ति की छटपटाहट का यहाँ पहली बार सर्जनात्मक उद्घाटन किया गया है।
इन सबको जानने, समझने हेतु सभी पाठकों के लिए यह कृति पठनीय, विचारणीय और संग्रहणीय है।




![Shakti Ke 48 Niyam [Hindi translation of '48 Laws of Power'] By Robert Greene (Hindi) (9788184081039)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788184081039.jpeg)

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