Description
“‘पक्षद्र्रोह’ प्रजातांत्रिक शासन-व्यवस्था के बीच नौकरशाही एवं सामाजिक राजनैतिक क्षेत्र में गहरी जडे़ं जमा चुके भ्रष्टाचार से उत्पन्न संत्रास पर आधारित विचार-प्रधान कथा है, जिसमें युवा वर्ग के सपने और उनकी संवेदनाओं को छलते पाखंड, भ्रष्ट तंत्र व समाज पर कठोर प्रहार करता है। ‘पक्षद्रोह’ का नायक विक्रम युवा है, जो मध्यम वर्ग के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद है। वह मनचाही चल रही ढर्रे कि व्यवस्था में भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने कि कोशिश करता है। जहाँ एक ओर सुविधाभोगी शिष्ट समाज में भ्रष्टाचार समाज का एक अभिन्न अंग माना जाता है, वहीं दूसरी ओर युवावस्था की नई कोंपलों के मनोमस्तिष्क पर होते गहरे आघात को स्पष्टतः कहानी में देखा जा सकता है। इस पुस्तक में उसकी ईमानदारी, निर्भीकता, राष्ट्र-परायणता और युवा-मन में उपजे प्रेम के प्रति सादगीपूर्ण संवेदनशीलता का जीता-जागता चित्र उपस्थित किया गया है। ‘पक्षद्रोह’ में बहुत सी बातें ऐसी हैं, जिनमें व्यंग्य, विरोध, कसक, वेदना, त्याग, अनुभव, आदर्श, देश और समाज को देने की आतुरता प्रत्यक्ष परिलक्षित होती है। उपन्यास अपने प्रत्येक भाग में जहाँ समाज की विसंगतियों पर सोचने के लिए मजबूर करता है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार में लिप्त समाज के लिए संदेश भी देता है।
—प्रदीप पांडेय, सोशल थिंकर एवं मोटिवेशनल स्पीकर




![21vi Sadi Ka Vyavasay [Hindi translation of 'The Business of the 21st Century'] (Hindi) By Robert T. Kiyosaki (9788183222617)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788183222617.jpeg)

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