Description
बच्चों की व्यवस्थित शिक्षा एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा संवेदनशील कार्य है। विशेषकर 14 वर्ष की अवस्था तक के बच्चों को पठन-पाठन के लिए प्रवृत्त करने तथा उनके आधिगमिक स्तर को बढ़ाने के लिए उनकी मनःस्थिति, परिवेश तथा भाषा को ध्यान में रखना शिक्षक के लिए आवश्यक होता है। यही कारण है कि लेखक ने पुस्तक में व्यक्तित्व विकास के विविध चरणों का वर्णन करते हुए तत्समय की वयोजन्य विशेषताओं और शिक्षक द्वारा ध्यान देनेवाले बिन्दुओं पर प्रकाश डाला है।
कुछ बच्चे कक्षा में औसत से कम आधिगमिक प्रदर्शन करते हैं। प्रस्तुत पुस्तक में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे बच्चों को शीघ्रता में मानसिकमन्द बालक नहीं मान लेना चाहिए; बल्कि उनके परिवेश का अध्ययन कर, वास्तविक निदान कर शिक्षक द्वारा यथोचित निर्णय के साथ बच्चे से व्यवहार करना चाहिए।
विद्यालयी शिक्षा के सन्दर्भ में शोध की महत्ता पर भी बल दिया गया है। एक बहुत ही उपयोगी और महत्त्वपूर्ण पुस्तक।


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