Description
‘‘गैर-मार्ग पर गए लोगों को वापस लाना तो सरल है, परंतु गैर-समझ के शिकार हुए लोगों को लौटाने में तो नाक में दम आ जाता है।’’
‘‘अच्छी वर्षा किसान की मेहनत को सार्थक बना देती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल कर देता है।’’
‘‘सही हो तो भी किसी बात में या अच्छा समाचार हो, तो भी बिना शंका किए बुद्धि का काम नहीं चलता, जबकि कमजोर बात या कमजोर समाचार को सच मान लेने को मन फौरन तैयार नहीं होता।’’
‘‘पानी भले ही गरम हो, आग को वह बुझा देता
है। पेट्रोल भले ही ठंडा हो, आग को वह भड़का देता है।’’
‘‘घटना भले हमारे हाथ में नहीं, परंतु घटना का अर्थ- घटन कैसे किया जाए, यह तो हमारे हाथ में है।’’
‘‘इच्छाओं को शांत करने की बात बाद में करना, पहले इच्छाओं को निर्मल तो करें। इच्छाओं की निर्मलता मन को स्वस्थ करके ही रहेगी।’’
‘‘दुर्व्यसन मात्र चरित्र का पतन ही नहीं करते, प्रसन्नता का भी हनन करते हैं।’’
‘‘प्रभु, मुझसे यदि भूलें होती ही रहने वाली हों, तो भी पुरानी भूलें मैं एक बार भी न दोहराऊँ, ऐसी ताकत तो मुझे दे ही देना।’’
‘‘हमेशा रोते इनसान किसी को पसंद नहीं, तो हमेशा हँसते इनसान किसी के आड़े नहीं।’’
‘‘ज्यादा रस हमें किस में है? खुलने में, स्वयं को खुला करने में या सामनेवाले को खोलने में?’’
‘‘उत्थान के शिखर की ऊँचाई का निर्णय न हो तो कोई बात नहीं, पतन के तल की गहराई तो निश्चित कर लो।’’
‘‘अच्छी वर्षा कृषक की मेहनत को सार्थक करती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल बना देता है।’’
‘‘जो बोए, वही देने की जवाबदारी धरती की है; परंतु क्या बोना है, उसका चयन करने का अधिकार हमारे हाथ में है।’’
‘‘मंदिर भव्य बने, यह तो अच्छा ही है; परंतु मंदिर में जानेवालों का जीवन भी भव्य बने, यह भी उतना ही जरूरी है।’’
‘‘गैर-मार्ग पर गए लोगों को वापस लाना तो सरल है, परंतु गैर-समझ के शिकार हुए लोगों को लौटाने में तो नाक में दम आ जाता है।’’
‘‘अच्छी वर्षा किसान की मेहनत को सार्थक बना देती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल कर देता है।’’
‘‘सही हो तो भी किसी बात में या अच्छा समाचार हो, तो भी बिना शंका किए बुद्धि का काम नहीं चलता, जबकि कमजोर बात या कमजोर समाचार को सच मान लेने को मन फौरन तैयार नहीं होता।’’
‘‘पानी भले ही गरम हो, आग को वह बुझा देता
है। पेट्रोल भले ही ठंडा हो, आग को वह भड़का देता है।’’
‘‘घटना भले हमारे हाथ में नहीं, परंतु घटना का अर्थ- घटन कैसे किया जाए, यह तो हमारे हाथ में है।’’
‘‘इच्छाओं को शांत करने की बात बाद में करना, पहले इच्छाओं को निर्मल तो करें। इच्छाओं की निर्मलता मन को स्वस्थ करके ही रहेगी।’’
‘‘दुर्व्यसन मात्र चरित्र का पतन ही नहीं करते, प्रसन्नता का भी हनन करते हैं।’’
‘‘प्रभु, मुझसे यदि भूलें होती ही रहने वाली हों, तो भी पुरानी भूलें मैं एक बार भी न दोहराऊँ, ऐसी ताकत तो मुझे दे ही देना।’’
‘‘हमेशा रोते इनसान किसी को पसंद नहीं, तो हमेशा हँसते इनसान किसी के आड़े नहीं।’’
‘‘ज्यादा रस हमें किस में है? खुलने में, स्वयं को खुला करने में या सामनेवाले को खोलने में?’’
‘‘उत्थान के शिखर की ऊँचाई का निर्णय न हो तो कोई बात नहीं, पतन के तल की गहराई तो निश्चित कर लो।’’
‘‘अच्छी वर्षा कृषक की मेहनत को सार्थक करती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल बना देता है।’’
‘‘जो बोए, वही देने की जवाबदारी धरती की है; परंतु क्या बोना है, उसका चयन करने का अधिकार हमारे हाथ में है।’’
‘‘मंदिर भव्य बने, यह तो अच्छा ही है; परंतु मंदिर में जानेवालों का जीवन भी भव्य बने, यह भी उतना ही जरूरी है।’’



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