Description
मध्यकालीन भारतीय समाज में जब धार्मिक कर्मकांड, जातिगत विभाजन और स्त्रियों की सामाजिक स्थिति अत्यंत जटिल हो गई थी, तब भक्ति ने एक नए प्रकार की आध्यात्मिक चेतना को जन्म दिया। इस चेतना में केवल पुरुष संत ही सक्रिय नहीं थे, बल्कि कई स्त्री संतों ने भी अपने जीवन और काव्य के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। भारतीय भक्ति आंदोलन में संत स्त्रियों का योगदान केवल व्यक्तिगत साधना या काव्य-रचना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भक्ति को एक नया स्वर, नई संवेदना और नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
उनकी रचनाओं में स्त्री-अनुभवों की स्पष्ट गूंज सुनाई देती है। गार्गी और मैत्रेयी जैसी वैदिक विदुषियों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मध्यकालीन संत स्त्रियों ने अपने जीवन और वाणी से यह सिद्ध किया कि ज्ञान और भक्ति का संसार स्त्रियों के लिए भी समान रूप से खुला है। विशेष रूप से ललद्यद, अक्का महादेवी, मीरा बाई, जनाबाई, मुक्ताबाई और बहिनाबाई की कविताएँ इस बात की प्रमाण हैं कि भक्ति केवल धार्मिक मार्ग नहीं, बल्कि स्त्री की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का साधन भी बन सकती है।



![Business School [Hindi translation of 'The Business School'] By Robert T. Kiyosaki (9788186775820)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788186775820.jpeg)


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