Description
“माँ, लगाओअँगूठा !”मँझलेनेअँगूठेपरस्याहीलगानेकीतैयारीकरली, लेकिनउन्होंनेचीकूसेपैनमाँगकरटेढ़े-मेढेअक्षरोंमेंबडेमनोयोगसेलिखदिया-‘कैलाशोदेवी”।उन्हेंक्यापताथाकियहलिखावटउनकेनामचढ़ीदसबीघेजमीनकोभीछीनलेजाएगीऔरआजसेउनकाबुढापारेहनचढजाएगा।रेहनमेंचढाबुढापा, बिकीहुईआस्थाएँ, कुचलेहुएसपने, धुंधलाताभविष्य-इन्हींदुख-दर्दकीघटनाओंकेताने-बानेनेचुनीयेकहानियाँइक्कीसवींशताब्दीकीदेहरीपरदस्तकदेतेभारतकेग्रामीणसमाजकाआईनाहैं।एकओरआर्थिकप्रगति, दूसरीओरशोषणकायहसनातनस्वरुप! चाहे ‘अपना-अपनाआकाश’ कीअम्माहो, ‘चिन्हार’ कीसरजूया ‘आक्षेप’ कीरमिया, या ‘भंवर’ कीविरमा-सबकीअपनी-अपनीव्यथाएँहैं, अपनी-अपनीसीमाएँ।इन्हींसीमाओंसेबँधी, इनमरणोन्मुखीमानव-प्रतिमाओंकास्पंदनसहजहीसर्वत्रअनुभवहोताहै–प्राय: हरकहानीमें।लेखिकानेअपनेजिएहुएपरिवेशकोजिससहजतासेप्रस्तुतकियाहै, जिसस्वाभाविकतासे, उससेअनेकरचनाएँ, मात्ररचनाएंनबनकर, अपनेसमयका, अपनेसमाजकाएकदस्तावेजबनगईहैं।


![Rich Dad Poor Dad [Hindi translation of 'Rich Dad Poor Dad'] (Hindi) By Robert T. Kiyosaki (9788186775219)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788186775219.jpg)



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