Description
ढलती साँझ का सूरज
मधु कांकरिया की विशिष्ट पहचान; साहित्य को शोध और समाज के बीहड़ यथार्थ के साथ जोड़कर, मानवीय त्रासदी के अनेक पहलुओं की बारीक जाँच करना है। उपन्यास या कहानी लिखते समय, उनके सामने समाज ही नहीं, मानव कल्याण का अभिप्रेत रहता है। वे साहित्य लेखन को एक अभियान की तरह निभाती हैं। इसका यह मतलब बिलकुल नहीं है कि मधु के यहाँ व्यक्ति ग़ायब है। बल्कि व्यक्ति ही उनकी संवेदना और मानसिक उथल-पुथल का संवाहक बनता है। इसलिए उनके लेखन में तरह-तरह के पात्र हैं और हर पात्र की अपनी विसंगति है, अपने वैयक्तिक राग-विराग हैं, अपने संघर्ष हैं तो अपने अनाचार-दुराचार भी हैं। उनके वैविध्यपूर्ण और सामाजिक सरोकारों से सम्पृक्त लेखन में शोध भी है, तथ्य भी पर सबसे ऊपर है, मानवीय अनुभूति और बुनियादी सवालों रूबरू होने की कूवत।



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