Description
अंतर्वस्तु
यह उपन्यास एक ऐसे राजवंश से संबंधित है, जो सम्राट् पृथ्वीराज चौहान केवंशज रहे। पानीपत की पहली लड़ाई के दौरान परिस्थितिवश उन्हें इसलाम स्वीकार करना पड़ा, लेकिन सगोत्रियों तथा अपने पूर्वजों के संस्कारों पर उनकी आस्था यथावत् बनी रही; ठीक वैसे ही, जैसे इंडोनेशिया के निवासी पंथ बदलने के बाद भी अपने पूर्वजों की संस्कृति पर आज भी आस्था रखते हैं।
रामकथा लगभग संपूर्ण एशिया की आस्था का केंद्र रही है और आज भी इसमें इस पूरे क्षेत्र को एकता केसूत्र में पिरोने की अद्भुत क्षमता है। अयोध्या में भव्य राम-मंदिर के निर्माण ने इस आस्था को और अधिक बलवती किया है।
‘पंथ बदलने पर भी हम अपनी संस्कृति
से बँधे रहते हैं’ यह भाव इस ऐतिहासिक उपन्यासका प्राण-तत्त्व है।
यह ऐतिहासिक उपन्यास अपने तरीके से भारतीय संस्कृति की जिजीविषा की अनूठी कहानी एक अनूठे अंदाज में प्रस्तुत करता है। यह कहानी खंड-खंड से प्रचंड शक्ति बनने की कहानी है। यह अंधकार को चीरकर प्रकाश का नया सूरज उगाने की कहानी है। यह अनेक रोचक ऐतिहासिक तथ्यों का उद्घाटन भी करता है, जो भारतीय इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखने का कुतूहल पैदा करता है। यह अनेक उलझी हुई समस्याओं के समाधान के रास्ते भी सुझाता है।



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