Description
शैलेश मटियानी हिंदी के शीर्षस्थ उपन्यासकार थे। भारतीय कथा साहित्य की जनवादी जातीय परंपरा से शैलेश मटियानी के कथा साहित्य का अटूट रिश्ता है। वे दबे-कुचले, भूखे-नंगों, दलितों-उपेक्षितों के व्यापक संसार को बड़ी आत्मीयता से अपनी कथा में पनाह देते हैं। उपेक्षित और बेसहारा लोग ही मटियानी की रचना की ताकत हैं। दलित एवं उपेक्षित जीवन का व्यापक और विशाल अनुभव तथा उनकी जिजीविषा एवं संघर्ष को अपनी कथा-रचना में ढाल देने की सिद्धहस्तता मटियानी को कथा के शिखर पर पहुँचाती है।
इस उपन्यासद्वय में शैलेश मटियानी के दो सामाजिक उपन्यास ‘कोई अजनबी नहीं’ और ‘मंजिल-दर-मंजिल’ प्रस्तुत हैं। दोनों उपन्यास कारुणिक, मार्मिक व हृदयस्पर्शी हैं, जो पाठकों के अंतर्मन को छू जाएँगे।




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