Description
`माधवी` यह उपन्यास जीवन के विरोधाभासों की कथा है। इसमें ययाति जैसा स्वकेन्द्रित, आत्ममोहित और परपीड़क महापात्र भी है तो गालव और माधवी जैसे कर्तव्यनिष्ठ, आज्ञाकारी और ऋणमुक्ति के नैतिक दबाव से ग्रस्त पात्र भी हैं।…उनके संघर्ष और समन्वय जैसे कुछ बिन्दुओं पर ठहरते-ठिठकते हुए मुझे बीसवीं सदी के फ्रेंच चित्रकार बाल्थस की उस बात का ख्याल आता रहा था कि `केवल परम्परा ही क्रान्तिकारी होती है।






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