Description
समाज के उच्च वर्ग, विशेषतया ब्राह्मण समाज में नारी का कितना और किस तरह भावनात्मक शोषण किया जाता रहा है, इस के ज्वलंत उदाहरण हैं शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘ब्राह्मण की बेटी’ तथा ‘पंडित जी’, जिन का एकत्र संग्रह है ‘ब्राह्मण की बेटी’-
इन दोनों उपन्यासों में ऊंचनीच, छुआछूत, अमीरीगरीबी, बालविवाह आदि सामाजिक बुराइयों की शिकार नारियों की करुण कथाओं के माध्यम से नारी वेदना की गहन अभिव्यक्ति हुई। संभवतया इसीलिए उन्हें ‘नारी वेदना का पुरोहित’ कहा गया है।






Reviews
There are no reviews yet.