Description
सांप्रदायिक सद्भावना की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पण करने वाले महात्मा गांधी को पूरी दुनिया ने स्वीकारा, सराहा और विश्वशांति का दूत मानकर सम्मान दिया। दो विश्व युद्धों के बीच सत्य और अहिंसा का संदेश देने वाले गांधी ने जीवन का जो अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया, उसके लिए महान् वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि ‘आगे आने वाली पीढ़ियाँ मुश्किल से विश्वास कर पाएँगी कि कोई हाड़-मांस का ऐसा व्यक्ति भी इस पृथ्वी पर पैदा हुआ था’ गांधीजी का समग्र जीवन सत्य से सत्याग्रह तक की महागाथा है।
प्रस्तुत संकलन गांधी वाङ्मय के आधार पर गांधी के महत्त्वपूर्ण विचारों को उन्हीं के शब्दों में प्रस्तुत करने का एक लघु प्रयास है। दक्षिण अफ्रीका प्रवास से लेकर जीवन के अंतिम समय तक गांधी लगातार चलते रहे, बोलते रहे, लिखते रहे और लोगों से निरंतर संवाद करते रहे। इन विचारों में सत्य और अहिंसा, धर्म, शिक्षा, अस्पृश्यता, स्वराज्य, असहयोग, सत्याग्रह आदि के अतिरिक्त जीवन में व्यवहार की बहुत सी बातें समाहित हैं। यह दावा कतई नहीं किया जा सकता है कि उनके सभी महत्त्वपूर्ण विचार यहाँ एकत्र कर लिये गए हैं, किंतु यह प्रयास अवश्य है कि उनके जो विचार आज भी विश्व कल्याण एवं मानवीय सभ्यता के लिए आवश्यक हैं, उन्हें पाठक वर्ग के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।”




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