Description
भारत की आजादी के बाद से ही
कुछ मुट्ठी भर राष्ट्रविरोधी छद्म विचारकों द्वारा राष्ट्रवाद का प्रयोग संकुचित और सीमित अर्थों में किया जाने लगा, जबकि राष्ट्रवाद किसी भी देश के नागरिकों की अपने देश के प्रति वह रागात्मक भावना है, जिसके कारण वह बिना किसी निजी स्वार्थ के राष्ट्र की प्राकृतिक, भौतिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक अस्मिता से एक स्वाभाविक प्रेम रखता है। यही वह भावना है जो एक ही राष्ट्र में विविध भाषाओं, वर्गों और संस्कृतियों को एक सूत्र में जोड़ते हुए उसे राष्ट्रप्रेम की ओर उन्मुख करती है। दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि तथाकथित बड़े-बड़े लेखकों और चिंतकों ने भी भारतीय राष्ट्रवाद की नकारात्मक व्याख्या की, जबकि इसकी वैश्विक कल्याणकारी दृष्टि विश्व के प्राचीनतम साहित्य में भी उपलब्ध है।
राष्ट्रवाद, और विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रवाद क्या है, इसकी व्यापकता और इतिहास क्या है, इन सब बिंदुओं पर छाए हुए धुंध को दूर करना आवश्यक था, इसलिए यह पुस्तक की आवश्यकता प्रतीत हुई। राष्ट्रवाद को सही मायने में उसके सभी पक्षों के साथ संपूर्णता में व्याख्यायित करती विदुषी नीरजा माधव की यह पुस्तक वास्तव में एक चिंतनपरक राष्ट्रीय प्रकाश-स्तंभ है, जिसकी उपादेयता सार्वकालिक है।





![Business School [Hindi translation of 'The Business School'] By Robert T. Kiyosaki (9788186775820)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788186775820.jpeg)
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