Description
मातृभाषा हिन्दी में तो क्या, अंग्रेजी सहित भारत की किसी भी भाषा में परिवार, विवाह और नातेदारी संबंधों के सर्वांगीण एवं समसामयिक विवेचन का सर्वथा अभाव रहा है। डा. शोभिता जैन द्वारा मौलिक रूप से लिखी गई यह पुस्तक इस कमी को पूरा करने का प्रथम प्रयास है। यह एक सुगम पाठ्य पुस्तक तो है ही, साथ में इसे विचारपूर्ण समन्वय, सारग्रंथों के अधुनातन निष्कर्षों और स्पष्ट एवं सटीक भाषा में निरूपित दृष्टान्तों की त्रिवेणी भी कहा जा सकता है। जहाँ एक ओर पितृवंशीय परिवार, विवाह एवं नातेदारी की समग्र व्याख्या की गई है, वहीं दूसरी ओर भारत के दक्षिण-पश्चिमी एवं उत्तर-पूर्वीय अंचलों में मातृवंशीय परम्पराओं का दिग्दर्शन इस खूबी के साथ किया गया है कि पूरे भारत का समाजशास्त्रीय मानचित्र स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ जाता है। भारतीय समाज की मूलभूत इकाईयों के माध्यम से विविधता में एकता का ऐसा विवरण व विवेचन इस पुस्तक से पहले हिन्दी में उपलब्ध ही नहीं था। यह ग्रंथ विद्यार्थियों, अध्यापकों और अध्येताओं के समक्ष न सिर्फ नई सामग्री प्रस्तुत करता है, बल्कि बदलते समाज में नये प्रतिमानों एवं मूल्यों के कीर्तिमान भी अंकित करता है। नातेदारी के समाजशास्त्र की तकनीकी शब्दावली और अवधारणाओं को इसमें आरेखों एवं परिशिष्टों की मदद से सहज, सरल और पठनीय कर दिया गया है। वर्तमान बौद्धिक परिवेश में जहाँ मातृभाषा हिन्दी अभूतपूर्व नये आयामों से सज्जित है वहीं प्रस्तुत कृति के बारे में यह कहा जाना अतिशयोक्ति न होगी कि अपने विषय में यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों में परखी जायेगी और खरी उतरेगी।


![21vi Sadi Ka Vyavasay [Hindi translation of 'The Business of the 21st Century'] (Hindi) By Robert T. Kiyosaki (9788183222617)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788183222617.jpeg)



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