Description
”मैं एक रसिया हूँ। अपनी काम-वासना पूरी करने के अलावा मैं और कुछ नहीं कर पाता।” रसिया कहानी है एक ऐसे आदमी की जो अपनी काम-प्रवृत्ति का गुलाम है। वासना का भूत उसके सिर चढ़कर तो जैसे तांडव करता है और वह अपनी यौनेच्छाओं को पूरा करने की राह पर चलने को मजबूर है। इस राह पर उसे आनन्द तो मिलता है लेकिन साथ ही जोखिमों का सामना भी होता है। रस्किन बॉन्ड का यह लघु उपन्यास रसिया उनकी जानी-पहचानी शैली से हटकर है जिसमें उन्होंने मानव-प्रवृत्ति के नकारात्मक पक्षों को उजागर किया है। ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’, ‘पद्मश्री’ और ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित रस्किन बॉन्ड की अन्य उल्लेखनीय पुस्तकें हैं – रूम ऑन द रूफ़, वे आवारा दिन, एडवेंचर्स ऑफ़ रस्टी, नाइट ट्रेन ऐट देओली, दिल्ली अब दूर नहीं, उड़ान, पैन्थर्स मून, अंधेरे में एक चेहरा, अजब-गज़ब मेरी दुनिया और मुट्ठी भर यादें ।


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