Description
विंध्याचल पर्वत मध्य रात्रि के निविड़ अंधकार में कालदेव की भांति खड़ा था. उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दृष्टिगोचर होते थे, मानो यह उसकी जटाएँ है और अष्टभुजा देवी का मंदिर जिसके कलस पर श्वेत पताकाएँ वायु की मंद-मंद तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था.




![21vi Sadi Ka Vyavasay [Hindi translation of 'The Business of the 21st Century'] (Hindi) By Robert T. Kiyosaki (9788183222617)](https://universalbooksellers.com/wp-content/uploads/2019/01/9788183222617.jpeg)

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